Pocket booklet · पॉकेट पुस्तिका
Om Jai Jagdish Hare · Jai Ambe Gauri · Jai Ganesh Deva · Jai Hanuman · Sai Aarti
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Chorus
ॐ जय जगदीश हरे।
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट,
दास जनों के संकट,
क्षण में दूर करे।।
ॐ जय जगदीश हरे।।
हे जगत के स्वामी, आपकी जय हो। आप अपने भक्तों और सेवकों के संकट पल भर में दूर कर देते हैं।
Victory to You, Lord of the universe! You who remove in an instant the troubles of your devotees and servants.
Verse 1
जो ध्यावे फल पावे,
दुख बिनसे मन का।
स्वामी दुख बिनसे मन का।
सुख संपत्ति घर आवे,
सुख संपत्ति घर आवे,
कष्ट मिटे तन का।।
जो आपका ध्यान करता है, उसे फल मिलता है और उसके मन का दुःख मिट जाता है। उसके घर में सुख और संपत्ति आती है और शरीर के कष्ट दूर हो जाते हैं।
Whoever meditates on You receives fruit — the sorrow of the mind is destroyed. Joy and prosperity enter the home; bodily suffering is removed.
Verse 2
मात पिता तुम मेरे,
शरण गहूं मैं किसकी।
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी।
तुम बिन और न दूजा,
तुम बिन और न दूजा,
आस करूं मैं जिसकी।।
आप ही मेरे माता-पिता हैं, मैं और किसकी शरण में जाऊँ। आपके सिवा कोई दूसरा नहीं है, जिससे मैं आशा रखूँ।
You are my mother and father — whom else shall I turn to? Beside You, there is no other in whom I may hope.
Verse 3
तुम पूरण परमात्मा,
तुम अंतर्यामी।
स्वामी तुम अंतर्यामी।
पार-ब्रह्म परमेश्वर,
पार-ब्रह्म परमेश्वर,
तुम सबके स्वामी।।
आप पूर्ण परमात्मा हैं और सबके मन की जानने वाले अंतर्यामी हैं। आप परब्रह्म परमेश्वर हैं और सबके स्वामी हैं।
You are the Supreme Being, the inner witness. You are the transcendent Brahman, the great Lord of all.
Verse 4
तुम करुणा के सागर,
तुम पालन कर्ता।
स्वामी तुम पालन कर्ता।
मैं मूरख खल कामी,
मैं सेवक तुम स्वामी,
कृपा करो भर्ता।।
आप करुणा के सागर हैं और सबका पालन करने वाले हैं। मैं मूर्ख, दोषी और कामनाओं में बँधा हूँ, मैं सेवक हूँ और आप स्वामी हैं, हे प्रभु, मुझ पर कृपा कीजिए।
You are the ocean of compassion, the sustainer of all. I am foolish, flawed, bound by desire — I am servant, You are master. Grace me, O Lord.
Verse 5
विषय-विकार मिटाओ,
पाप हरो देवा।
स्वामी पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ,
संतन की सेवा।।
हे देव, मेरे विषय-विकार मिटाइए और मेरे पाप हर लीजिए। मेरी श्रद्धा और भक्ति बढ़ाइए और संतों की सेवा का भाव जगाइए।
Remove sensual delusions, destroy my sins, O Lord. Increase my faith and devotion, and the service of saints.
Chorus
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत,
हरि ब्रह्मा शिवरी।।
हे माँ अम्बे गौरी, आपकी जय हो! हे माँ श्यामा गौरी, आपकी जय हो! भगवान विष्णु, ब्रह्मा जी और शिव जी दिन-रात आपका ध्यान करते हैं।
Victory to Mother Amba, the fair one! Victory to Mother Shyama Gauri! Day and night, Vishnu, Brahma and Shiva meditate upon You.
Verse 1
मांग सिंदूर विराजत,
टीको मृगमद को।
उज्ज्वल से दोउ नैना,
चन्द्रवदन नीको।।
आपकी माँग में सिंदूर सजा है और माथे पर कस्तूरी का टीका है। आपके दोनों नेत्र उज्ज्वल हैं और चंद्रमा जैसा मुख अत्यंत सुंदर है।
Sindoor adorns your hair-parting, musk graces your forehead. Both your eyes shine bright, your moon-face is beautiful.
Verse 2
कनक समान कलेवर,
रक्ताम्बर राजै।
रक्त पुष्प गल माला,
कण्ठन पर साजै।।
आपका शरीर सोने के समान चमकता है और लाल वस्त्र शोभा दे रहे हैं। आपके गले में लाल फूलों की माला सजी है।
Your body shines like gold, your red garment radiates. A garland of red flowers adorns your throat.
Verse 3
केहरि वाहन राजत,
खड्ग खप्पर धारी।
सुर नर मुनिजन सेवत,
तिनके दुखहारी।।
आप सिंह पर सवार हैं और हाथों में तलवार और खप्पर धारण किए हैं। देवता, मनुष्य और मुनि आपकी सेवा करते हैं और आप उनके दुख हर लेती हैं।
You ride upon a lion, bearing sword and skull-cup. Gods, men, and sages serve you — you are the remover of their sorrows.
Verse 4
कानन कुण्डल शोभित,
नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर,
सम राजत ज्योती।।
आपके कानों में कुंडल शोभा देते हैं और नाक के अग्रभाग पर मोती सजा है। आपकी ज्योति करोड़ों सूर्यों और चंद्रमाओं के समान है।
Earrings grace your ears, a pearl adorns your nose-tip. Your radiance equals a crore suns and moons.
Verse 5
शुम्भ निशुम्भ विडारे,
महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना,
निशदिन मदमाती।।
आपने शुंभ और निशुंभ का संहार किया और महिषासुर का वध किया। धूम्रलोचन जैसे दैत्यों का नाश करने वाली आप दिन-रात अपने तेज में मग्न रहती हैं।
You destroyed Shumbha and Nishumbha, slayer of Mahishasura. With smoky-eyed intensity, you remain ever-ablaze.
Verse 6
चण्ड-मुण्ड संहारे,
शोणित बीज हरे।
मधु कैटभ दोउ मारे,
सुर भयहीन करे।।
आपने चंड और मुंड का संहार किया और रक्तबीज के रक्त से उपजे दैत्यों को मिटाया। आपने मधु और कैटभ दोनों को मारकर देवताओं को निर्भय किया।
You slew Chanda and Munda, destroyed Raktabija's blood-seeds. You killed both Madhu and Kaitabha, freeing the gods from fear.
Verse 7
ब्रह्माणी रुद्राणी तुम,
कमला रानी।
आगम निगम बखानी,
तुम शिव पटरानी।।
आप ही ब्रह्माणी, रुद्राणी और कमला रानी अर्थात लक्ष्मी जी हैं। शास्त्र और वेद आपका गुणगान करते हैं — आप शिव जी की पटरानी हैं।
You are Brahmani, Rudrani, and Queen Lakshmi. Scriptures and Vedas proclaim: You are Shiva's beloved consort.
Verse 8
चौंसठ योगिनि मंगल गावत,
नृत्य करत भैरूं।
बाजत ताल मृदंगा,
और बाजत डमरूं।।
चौंसठ योगिनियाँ मंगल गीत गाती हैं और भैरव जी नृत्य करते हैं। ताल और मृदंग बजते हैं और डमरू भी बजता है।
Sixty-four yoginis sing auspicious songs, Bhairava dances. Cymbals and mridanga drums resound, and the damaru plays.
Closing
अम्बे जी की आरती,
जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी,
सुख सम्पति पावै।।
स्वामी शिवानंद कहते हैं कि जो कोई माँ अम्बे की यह आरती गाता है, उसे सुख और संपत्ति प्राप्त होती है।
Whoever sings this aarti of Mother Amba, says Swami Shivananda, attains happiness and prosperity.
Chorus
जय गणेश जय गणेश,
जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती,
पिता महादेवा।।
हे गणेश जी, आपकी जय हो, जय हो। जिनकी माता पार्वती जी और पिता महादेव शिव जी हैं, उन गणेश देव की जय हो।
Victory to Ganesha! Victory to Lord Ganesha! Whose mother is Parvati and father is Shiva Mahadev.
Verse 1
एक दन्त दयावन्त,
चार भुजा धारी।
मस्तक पर तिलक सोहे,
मूसे की सवारी।।
आप एक दाँत वाले, दयालु और चार भुजाओं वाले हैं। आपके मस्तक पर तिलक शोभा देता है और चूहा आपकी सवारी है।
One-tusked, compassionate, bearing four arms. Tilak graces your forehead, your vehicle is the mouse.
Verse 2
पान चढ़े फल चढ़े,
और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे,
सन्त करें सेवा।।
आपको पान, फल और मेवे चढ़ाए जाते हैं। लड्डुओं का भोग लगता है और संत आपकी सेवा करते हैं।
Betel leaves, fruits, and dried fruits are offered. Laddoos are presented as prasad, saints perform your service.
Verse 3
अन्धन को आंख देत,
कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत,
निर्धन को माया।।
आप अंधों को आँखें और कोढ़ियों को स्वस्थ शरीर देते हैं। आप निःसंतानों को पुत्र और निर्धनों को धन देते हैं।
You give sight to the blind, healthy body to the leprous. You give sons to the childless, wealth to the poor.
Verse 4
हार चढ़े फूल चढ़े,
और चढ़े मेवा।
सूर श्याम शरण आये,
सफल कीजे सेवा।।
आपको हार, फूल और मेवे चढ़ाए जाते हैं। सूरदास और भक्त आपकी शरण में आए हैं, उनकी सेवा सफल कीजिए।
Garlands and flowers are offered, and dried fruits too. Surdas and devotees come to your refuge — make their service fruitful.
Closing
दीनन की लाज राखो,
शम्भु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो,
जय बलिहारी।।
हे शिव जी के पुत्र, दीन-दुखियों की लाज रखिए। हमारी मनोकामनाएँ पूरी कीजिए, हम आप पर बलिहारी जाते हैं, आपकी जय हो।
Protect the honour of the humble, O son of Shiva. Fulfil our desires — victory to You, we offer ourselves!
Chorus
आरती कीजै हनुमान लला की।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
आइए, प्यारे हनुमान जी की आरती करें, जो दुष्टों का नाश करने वाले और श्री राम की शक्ति के स्वरूप हैं।
Let us perform the aarti of beloved Hanuman — the destroyer of the wicked, embodiment of Lord Ram's power.
Verse 1
जाके बल से गिरिवर कांपे।
रोग दोष जाके निकट न झांके।।
अंजनि पुत्र महा बलदाई।
सन्तन के प्रभु सदा सहाई।।
जिनके बल से बड़े-बड़े पर्वत काँप जाते हैं और रोग-दोष जिनके पास झाँक भी नहीं सकते। अंजनी पुत्र महान बल देने वाले हैं और सदा संतों के सहायक हैं।
At whose strength mountains tremble, near whom disease and defect dare not peek. Son of Anjani, giver of immense strength, ever-helper of saints.
Verse 2
दे बीरा रघुनाथ पठाये।
लंका जारि सिया सुधि लाये।।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई।
जात पवनसुत बार न लाई।।
श्री राम की आज्ञा का बीड़ा लेकर आप चल पड़े, लंका जलाई और सीता माता का समाचार लाए। लंका जैसा किला और समुद्र जैसी खाई भी आपको रोक न सकी, पवनपुत्र बिना देर किए पार कर गए।
Taking Ram's commission, you set forth. You burned Lanka and brought news of Sita. Lanka's fortress and the ocean-moat posed no obstacle — the Wind's son crossed without delay.
Verse 3
लंका जारि असुर संहारे।
सियारामजी के काज संवारे।।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।
लाये संजीवन प्राण उबारे।।
आपने लंका जलाकर राक्षसों का संहार किया और सीता-राम जी के कार्य पूरे किए। जब सुबह लक्ष्मण जी मूर्छित पड़े थे, तब आपने संजीवनी लाकर उनके प्राण बचाए।
You burned Lanka and slew demons, accomplished Sita-Ram's mission. When Lakshman lay unconscious at dawn, you brought the Sanjivani herb and saved his life.
Verse 4
पैठि पताल तोरि जम-कारे।
अहिरावण की भुजा उखारे।।
बायें भुजा असुर दल मारे।
दाहिने भुजा सन्तजन तारे।।
आपने पाताल में प्रवेश करके यमराज के बंधन तोड़ दिए और अहिरावण की भुजाएँ उखाड़ दीं। बाएँ हाथ से आपने राक्षसों के दल को मारा और दाएँ हाथ से संतजनों का उद्धार किया।
You entered the netherworld, broke Yama's hold, uprooted Ahiravana's arms. With your left hand you slew demons; with your right you saved the saintly.
Closing
सुर नर मुनि जन आरती उतारें।
जय जय जय हनुमान उचारें।।
कंचन थार कपूर लौ छाई।
आरती करत अंजनी माई।।
देवता, मनुष्य और मुनि आपकी आरती उतारते हैं और जय जय जय हनुमान का जयकारा लगाते हैं। सोने की थाली में कपूर की लौ जगमगा रही है और स्वयं माता अंजनी आपकी आरती कर रही हैं।
Gods, men, and sages perform your aarti, chanting "Victory, victory, victory to Hanuman!" On a golden plate, camphor flame flickers — Mother Anjani herself performs the aarti.
Opening
आरती साईं बाबा, सौख्यदातार जीवा।
चरणरजातली, द्यावा दासां विसावा, भक्तां विसावा।।
सब प्राणियों को सुख देने वाले साईं बाबा की आरती है। हे भक्तों के आश्रय, अपने सेवकों को अपने चरणों की धूल में शरण दीजिए।
Hail Sai Baba, giver of all happiness to beings. Grant your servants shelter at the dust of your feet, O refuge of devotees.
Verse 1
जाळुनिया अनंग, स्वस्वरूपी राहे दंग।
मुमुक्षु जनांसी, दावी निज डोळां श्री रंग।।
आपने कामनाओं को जलाकर नष्ट कर दिया है और अपने सच्चे स्वरूप में लीन रहते हैं। मोक्ष चाहने वालों को आप उनकी अपनी आँखों से भगवान श्री रंग के दर्शन कराते हैं।
Having burned desire, you rest absorbed in your true nature. To seekers of liberation, you show Shri Ranga (the Lord) with your own eyes.
Verse 2
जया मनी जैसा भाव, तया तैसा अनुभव।
दाविसी दयाघना, ऐसी तुझी ही माव।।
जिसके मन में आपके प्रति जैसा भाव होता है, उसे वैसा ही अनुभव होता है। हे करुणा के सागर, आप उसी के अनुसार अपने दर्शन देते हैं, ऐसी ही आपकी लीला है।
As one holds You in mind, so does one experience You. You reveal Yourself accordingly, O compassionate Mother — such is Your way.
Verse 3
तुमचे नामधारी, भक्त हित दक्षधारी।
अद्भुत तुझी करणी, मार्ग दावीसी सकला।।
जो आपका नाम धारण करते हैं, उनके कल्याण की आप सजग होकर रक्षा करते हैं। आपके कार्य अद्भुत हैं, आप सबको सही मार्ग दिखाते हैं।
Those who bear Your name — their welfare You guard with vigilance. Wondrous are Your deeds, O guide of all upon the path.
Verse 4
कलियुगी अवतार, सगुण ब्रह्म साचार।
अवतीर्ण झालासे, स्वामी दत्त दिगंबर।।
आप कलियुग के अवतार हैं, निराकार ब्रह्म का साकार रूप हैं। आप स्वयं दिगंबर भगवान दत्तात्रेय के रूप में अवतरित हुए हैं।
An avatar in the Kali Yuga, the formless Brahman in form. You have descended as Lord Datta, the sky-clad.
Verse 5
आठा दिवसा गुरुवारी, भक्त करिती वारी।
प्रभुपद पहावया, भवभय निवारी।।
हर आठवें दिन गुरुवार को भक्त आपके दर्शन के लिए यात्रा करते हैं। हे प्रभु, संसार के भय को दूर करने वाले आपके चरणों के दर्शन के लिए वे आते हैं।
Every eighth day, on Thursday, devotees make pilgrimage. To see your lotus feet, O Lord — remover of worldly fear.
Verse 6
माझा निज द्रव्यठेवा, तव चरणरज सेवा।
मागणे हेची आता, तुम्हां देवाधि देवा।।
आपके चरणों की धूल की सेवा ही मेरा सच्चा खजाना है। हे देवों के देव, अब मैं आपसे केवल यही माँगता हूँ।
My true treasure is service at the dust of Your feet. This alone I now ask of You, O God of gods.
Verse 7
इच्छित दीन चातक, निर्मल तोय निजसूख।
पाजावे माधवा या, सांभाळ आपुली भाक।।
जैसे दीन चातक पक्षी केवल निर्मल जल चाहता है, जो उसका एकमात्र सुख है। हे माधव, मुझे भी यह अमृत पिलाइए और अपने करुणा भरे वचन की लाज रखिए।
The humble chataka bird seeks pure water, its sole joy. Grant this nourishment, O Madhava — honour your own compassionate pledge.
Closing
जय देव जय देव, जय साईनाथ दयाला।
धांवसी मज सांकटी, दावूनि मुखचंद्र जोडे।।
हे देव, आपकी जय हो, हे दयालु साईनाथ, आपकी जय हो। संकट में आप मेरे पास दौड़े चले आते हैं और अपने चंद्रमा जैसे मुख के दर्शन देकर आशीर्वाद देते हैं।
Victory, victory, victory to compassionate Sainath. You rush to me in crisis, showing your moon-like face in blessing.
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